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मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और भारतीय धर्म ग्रन्थ
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन की पूर्व सूचना हमें बाइबल, तौरेत और अन्य धर्म ग्रन्थों में मिलती है, यहाँ तक कि भारतीय धर्मग्रम्थों में भी आप के आने की भविष्यवाणियाँ मिलती हैं। हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म की पुस्तकों में इस प्रकार की पूर्व-सूचनाएँ मिलती हैं। इस पुस्तिका में सब को अकत्र करके पेश करने का प्रयास किया गया है। और यह सिद्ध किया गया है कि जिस नराशंस या कल्कि अवतार के आगमन का उनके धर्मग्रन्थों में उल्लेख हुआ है और उसकी जो विशेषतायें वर्णित हुई हैं, वह इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ही हैं। इसलिए जीवन की सुगम, सार्थक, सफल और फलदाई यात्रा के लिए अल्लाह के अन्तिम पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के द्वारा पेश की गई शिक्षाओं को अपनाया जाए और उनके बताये हुए मार्ग पर चला जाए।
M.A. Sariwasto
यही इस्लाम है
क्या आप अपने आस-पास और मीडिया में बहुचर्चित विषय धर्म के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना नहीं चाहते? कृपया आप थोड़ी देर रुक कर गहराई से सोचें उस धर्म के बारे में जो ग्लोबल आँकड़ों के अनुसार सबसे अधिक फैलने वाला और स्वीकार किया जाने वाला धर्म है । जब आप जीवन, धर्म और संसार के बारे में और समुदाय की धारणा और संस्कृतियों की खोज करते हैं, तो क्या आपको खुशी महसूस नहीं होती? आप इस्लाम की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए अपना बहुमूल्य समय क्यों नहीं देते । फिर अपनी बुद्धि और विवेक के साथ निर्णय लें? यदि उपर्युक्त कोई चीज़ रोचक हो या उससे आप सहमत हों, तो यह पुस्तक आपके लिए निश्चित रूप से सहायक साबित होगी ।
Fahd Salem Bahammam
सच्चा रास्ता
इसमें कोई संदेह नहीं कि यह दुनिया नश्वर है, और परलोक का जीवन ही सदैव बाक़ी रहने वाला और मनुष्य का स्थायी घर है। यह सांसारिक जीवन मात्र एक परीक्षा और परलोक की तैयारी और उसकी खेती है। तथा लोक और परलोक की सफलता और सौभाग्य प्राप्त करने का एकमात्र रास्ता वह सीधा मार्ग है जिसे हमारे संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं। अतः जो व्यक्ति इस पर चलेगा वह सफल होगा और जो उससे उपेक्षा करेगा वह घाटे में रहेगा। इस पुस्तिका में उसी रास्ते का निर्देशन किया गया है।
Waheed Uddin Khan
आठ भ्रांतियां एवं उनके उत्तर"
यह (अ़रबी पुस्तक का) हिंदी अनुवाद है, इसमें लेखक - अल्लाह उसे अच्छा बदलाव दे - ने उन महत्वपूर्ण संदेहों का उल्लेख किया है, कब्र में दफन हुए पैगंबरों एवं नेक लोगों को पूकारने वाले जिन का सहारा लेते हैं,और यह दावा करते हैं कि यह धामिर्क एवं सत्य प्रमाण हैं,लेखक ने इन शंकाओं का बहुत ध्यानपूर्वक और गहराई से समीक्षा किया है,और यह साबित किया है कि इन संदेहों का कोई वजन और मापदंड नहीं,क्योंकि इन संदेहों का आधार या तो कमजोर और मनगढंत हदीसों पर है, अथवा किस्से कहानियों पर,अथवा गलत एवं निराधार तर्कसंगत अटकलों पर, जो कि क़ुरान एवं हदीस के प्रमाणों, सहा़बा की समझ और मुसलमानों की सहमति के सामने कोई महत्व नहीं रखते।
Majed S. Al-Rassi